क्राइम

घर के अंदर जमीन में छिपाकर रखे थे नोटों से भरे तीन ड्रम, रकम के मालिक की तलाश में जुटी पुलिस और आयकर विभाग

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक मकान से भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के मामले में अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि करोड़ों रुपये किसके हैं और उन्हें वहां किस मकसद से छिपाकर रखा गया था। नवाबगंज थाना क्षेत्र के बरईपुर रामनगर गांव में मिले नोटों से भरे तीन ड्रम की जांच के लिए गुरुवार रात आयकर विभाग की छह सदस्यीय टीम भी पहुंच गई। वहीं, मकान मालिक राजेश उर्फ बबलू और उसके भाई राकेश ने पुलिस पूछताछ में बरामद रकम को अपना मानने से इनकार किया है।

जानकारी के मुताबिक, दीपावली को देखते हुए गंगानगर जोन की पुलिस चोरी और नकबजनी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अभियान चला रही थी। इसी दौरान बुधवार को पुलिस को सूचना मिली कि राजेश और उसके भाई राकेश के मकान में बड़ी मात्रा में नकदी छिपाकर रखी गई है। इसके बाद एडीसीपी पुष्कर वर्मा और एसीपी श्यामजीत प्रमिला सिंह के नेतृत्व में कई थानों की पुलिस ने मकान पर छापा मारा।

तलाशी के दौरान पुलिस को घर के अंदर जमीन में दबाकर रखे गए प्लास्टिक के तीन ड्रम मिले। उन्हें बाहर निकालकर खोला गया तो उनमें 500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं। पुलिस ने बरामद नकदी को कब्जे में लेकर थाने के मालखाने में रखवाया और आयकर विभाग समेत संबंधित एजेंसियों को सूचना दी। हालांकि, बरामद रकम की वास्तविक मात्रा अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मकान मालिक दोनों भाइयों सहित चार लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। परिवार के अन्य सदस्यों से भी नकदी के संबंध में जानकारी जुटाई गई, लेकिन रकम के स्रोत का पता नहीं चल सका। गुरुवार को पुलिस ने मकान सील कर दिया। इसके बाद रात करीब आठ बजे सहायक आयुक्त के नेतृत्व में आयकर विभाग की छह सदस्यीय टीम गांव पहुंची और जांच शुरू की। टीम की ओर से नकदी की गिनती के लिए मशीनों के इस्तेमाल और अन्य संभावित स्थानों की तलाशी की बात सामने आई है।

मुंबई और पुणे में काम करने के बाद गांव लौटा था राजेश

ग्रामीणों के अनुसार, राजेश यादव करीब 15 साल पहले मुंबई गया था, जहां उसने एक कंपनी में काम करने की बात बताई थी। इसके बाद वह पुणे चला गया और वहां आभूषण की दुकान में नौकरी करने की जानकारी दी। कोरोना काल में वह परिवार के साथ गांव लौट आया था। इसके बाद उसने दादनपुर, मुबारकपुर, मेंडारा और शांतिपुरम समेत अन्य क्षेत्रों में जमीन खरीदी। ग्रामीणों के मुताबिक, उसने ट्रैक्टर-ट्रॉली, पिकअप वाहन और अन्य संपत्तियां भी खरीदी थीं। उसकी संपत्ति में लगातार बढ़ोतरी को लेकर गांव में पहले से चर्चाएं होती रही हैं।

मारपीट के मुकदमे के बाद सामने आई थी नकदी की जानकारी

बताया जा रहा है कि नवाबगंज थाने में करीब आठ दिन पहले राजेश उर्फ बबलू, उसके भाई लवकुश, रजनीश उर्फ छोटू, राज और अमर यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। बरईपुर रामनगर निवासी अभिषेक कुमार ने यह प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

शिकायत के अनुसार, अभिषेक का छोटा भाई 15 माह की बच्ची आरू को दवा दिलाने जा रहा था। इसी दौरान राजेश और अन्य लोगों की गाड़ी से टक्कर लगने के बाद विवाद हुआ। आरोप है कि विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट की गई, जिसमें अभिषेक का भाई और बच्ची घायल हो गए। शिकायत में जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया था।

ग्रामीणों में चर्चा है कि इसी विवाद के बाद पुलिस को मकान में छिपाकर रखी गई नकदी की जानकारी मिली थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस मारपीट के मामले और बरामद रकम के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं की है।

फिलहाल पुलिस और आयकर विभाग की जांच जारी है। नोटों की गिनती पूरी होने और रकम के स्रोत का पता चलने के बाद ही इस पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।